
बहुत से मरीज जब पहली बार सर्जरी की बात सुनते हैं, तो उनके मन में सबसे पहला सवाल यही आता है—“क्या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी पूरी तरह सुरक्षित है?”
इंटरनेट पर अलग-अलग जानकारी, लोगों के अनुभव और कई तरह की बातें सुनकर भ्रम होना स्वाभाविक है। लेकिन सच्चाई यह है कि आज के समय में उचित मरीज का चयन, आधुनिक तकनीक और अनुभवी सर्जन के हाथों लैप्रोस्कोपिक सर्जरी दुनिया भर में सबसे अधिक अपनाई जाने वाली सर्जिकल तकनीकों में से एक है।
आइए समझते हैं कि यह कितनी सुरक्षित है, किन मामलों में इसका सबसे अधिक लाभ मिलता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी क्या होती है?

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी को सामान्य भाषा में “की-होल सर्जरी” भी कहा जाता है।
इसमें बड़े चीरे लगाने की बजाय पेट पर कुछ छोटे-छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिनके माध्यम से एक हाई-डेफिनिशन कैमरा और विशेष सर्जिकल उपकरण अंदर पहुंचाए जाते हैं।
कैमरे की मदद से सर्जन शरीर के अंदर के अंगों को बड़ी स्पष्टता से देखकर ऑपरेशन करते हैं।
इसे सुरक्षित क्यों माना जाता है?

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी को लोकप्रिय बनाने के पीछे केवल छोटे चीरे नहीं, बल्कि इसके कई वैज्ञानिक लाभ हैं।
1. छोटे चीरे
छोटे चीरे होने के कारण शरीर को कम चोट पहुँचती है और घाव जल्दी भरते हैं।
2. कम दर्द
अधिकांश मरीजों को ओपन सर्जरी की तुलना में ऑपरेशन के बाद कम दर्द महसूस होता है।
3. जल्दी रिकवरी
कई मरीज सामान्य गतिविधियों में अपेक्षाकृत जल्दी लौट पाते हैं।
4. संक्रमण का अपेक्षाकृत कम जोखिम
छोटे घाव होने से संक्रमण की संभावना कम हो सकती है, हालांकि यह पूरी तरह मरीज की स्थिति और ऑपरेशन के प्रकार पर भी निर्भर करती है।
5. बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम
छोटे निशान होने के कारण ऑपरेशन के बाद बड़े दाग की संभावना कम रहती है।
क्या हर मरीज के लिए लैप्रोस्कोपिक सर्जरी संभव है?
नहीं।
हालाँकि यह कई बीमारियों में पहला विकल्प बन चुकी है, लेकिन हर मरीज इसके लिए उपयुक्त नहीं होता।
कुछ मामलों में मरीज की मेडिकल स्थिति, बीमारी की गंभीरता, पहले हुई सर्जरी या अन्य कारणों की वजह से ओपन सर्जरी बेहतर विकल्प हो सकती है।
यही कारण है कि सबसे महत्वपूर्ण चीज तकनीक नहीं, बल्कि सही मरीज के लिए सही सर्जरी का चुनाव है।
किन बीमारियों में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का अधिक उपयोग होता है?

अनुभवी सर्जन निम्न स्थितियों में अक्सर लैप्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करते हैं:
- हर्निया
- गॉलब्लैडर स्टोन
- अपेंडिसाइटिस
- GERD की कुछ स्थितियाँ
- कुछ कोलोरेक्टल सर्जरी
- अन्य सामान्य एवं एडवांस्ड पेट की सर्जरी
क्या इसमें कोई जोखिम नहीं होता?
हर प्रकार की सर्जरी में कुछ न कुछ जोखिम होता है।
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी भी इसका अपवाद नहीं है।
हालाँकि, सही मरीज का चयन, ऑपरेशन से पहले उचित जांच, आधुनिक उपकरण और अनुभवी सर्जन इन जोखिमों को काफी हद तक कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कई बार ऑपरेशन के दौरान यदि मरीज की सुरक्षा के लिए आवश्यक हो, तो लैप्रोस्कोपिक सर्जरी को ओपन सर्जरी में बदलने का निर्णय लिया जा सकता है। यह किसी गलती का संकेत नहीं, बल्कि मरीज की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाला चिकित्सकीय निर्णय होता है।
जबलपुर में अनुभवी लैप्रोस्कोपिक सर्जन
यदि आप जानना चाहते हैं कि आपकी स्थिति में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी उपयुक्त है या नहीं, तो विशेषज्ञ से व्यक्तिगत जांच कराना सबसे सही कदम है।
Dr. Digant Pathak पिछले 20+ वर्षों से जनरल और एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के क्षेत्र में कार्यरत हैं।
उनके द्वारा 16,000+ सफल सर्जरी की जा चुकी हैं। वे विशेष रूप से Advanced Hernia & Gall Bladder Surgeon हैं तथा हर्निया, गॉलब्लैडर स्टोन, अपेंडिसाइटिस, GERD और कोलोरेक्टल सर्जरी में व्यापक अनुभव रखते हैं।
आप उनसे परामर्श ले सकते हैं:
Care Multi Speciality Hospital
Ukhari Chowk, MR-4 Road, Jabalpur
लोग यह भी पूछते हैं
क्या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में दर्द कम होता है?
अधिकांश मामलों में ओपन सर्जरी की तुलना में ऑपरेशन के बाद दर्द कम होता है।
क्या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद उसी दिन या अगले दिन घर जा सकते हैं?
कुछ सर्जरी में ऐसा संभव होता है, लेकिन यह बीमारी और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है।
क्या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में बड़े टांके लगते हैं?
नहीं, इसमें आमतौर पर छोटे चीरे लगाए जाते हैं।
क्या बुजुर्ग मरीज भी लैप्रोस्कोपिक सर्जरी करवा सकते हैं?
कई बुजुर्ग मरीज इसके लिए उपयुक्त हो सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच के बाद लिया जाता है।
क्या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी हमेशा ओपन सर्जरी से बेहतर होती है?
हर मरीज अलग होता है। कई मामलों में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के महत्वपूर्ण लाभ होते हैं, लेकिन सही विकल्प वही होता है जो आपकी बीमारी और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सबसे सुरक्षित हो।